श्री सिंहदेव ने ‘हमर ग्रामसभा’ में कहा कि स्थानीय निवासियों को ही वन संसाधनों का लाभ सबसे पहले मिलना चाहिए। वन अधिकार कानून के तहत ग्राम सभा को भी वन विभाग के साथ मिलकर जंगल की देखरेख, संरक्षण और संवर्धन के अधिकार दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन इस कानून को पूरी तरह लागू करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। वन अधिकार पत्रों के अस्वीकृत प्रकरणों पर पुनर्विचार कर पात्र लोगों को वन अधिकार पत्र जारी किए जा रहे हैं। वन अधिकार पत्र जारी करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में है। श्री सिंहदेव ने कार्यक्रम में बताया कि वन अधिकार कानून के अंतर्गत वन भूमि के सामुदायिक उपयोग के संबंध में फैसला लेने का अधिकार संबंधित ग्राम सभा को दिया गया है।