कबीर को हमेशा सुनते आए है, आज भी सुन रहे है, लेकिन फिर भी मन नहीं भरता: मुख्यमंत्री

*किस्सागोई के माध्यम से कहने-सुनने की परंपरा को पुनः स्थापित करने के लिए युवा कलाकारों के पहल को सराहा *मुख्यमंत्री ‘दास्तान-ए-कबीर‘ कार्यक्रम में हुए शामिल...